Skip to main content

एक अच्छा इंसान क्या देता है, और बुरा इंसान क्या छीन लेता है — जीवन का आईना

   By  VRight Path

हम सभी अपने जीवन में दो तरह के लोगों से मिलते हैंअच्छे इंसान और बुरे इंसान। ये सिर्फ शब्द नहीं हैं, बल्कि हमारे जीवन के अनुभवों की सबसे गहरी परत हैं। एक अच्छा इंसान हमारे जीवन में क्या देता है, और एक बुरा इंसान हमें क्या छीन लेता हैयह जानना, समझना और महसूस करना बेहद ज़रूरी है। (Read in English)

अच्छा इंसान क्या देता है?

एक अच्छा इंसान हमेशा देने वाला होता हैवो कुछ भी बड़ा नहीं देता, लेकिन जो देता है, वो दिल को छू जाता है।

·       समझदारी और सहारा: जब आप टूटते हैं, एक अच्छा इंसान चुपचाप आपके पास बैठता है। वो आपके आंसू नहीं पूछता, वो बस साथ होता है।

·       सम्मान और प्रेरणा: उसके शब्दों में सच्चाई होती है। वो आपकी कमज़ोरियों में भी ताकत ढूंढ लेता है और आपको ऊपर उठने का हौसला देता है।

·       माफ़ करने की शक्ति: अच्छा इंसान जानता है कि हर इंसान गलती करता है। वो गुस्सा नहीं रखता, वो दिल बड़ा रखता है।

·       ऊर्जा और सुकून: उसके साथ वक्त बिताकर आप थकते नहीं, बल्कि और ज़िंदा महसूस करते हैं।


बुरा इंसान क्या छीन लेता है?

बुरा इंसान ज़िंदगी से धीरे-धीरे वो सब छीन लेता है जो अमूल्य होता हैभरोसा, शांति, और आत्मसम्मान।

·       शक और डर: वो हर चीज़ में आपकी कमी निकालता है, जिससे आप खुद पर शक करने लगते हैं।

·       द्वेष और तनाव: उसकी संगत में आपको लगता है कि दुनिया एक बुरी जगह है, और आप कभी अच्छे नहीं बन सकते।

·       स्वार्थ और चालाकी: वो मदद का दिखावा करके अपने मतलब निकालता है, और जब आप गिरते हैं, तब गायब हो जाता है।

·       खट्टी यादें और पछतावा: उसके साथ बिताया वक्त बाद में अफ़सोस बनकर रह जाता है।

कौन सा इंसान बनना हैये चुनाव हमारा है

हम सबमें अच्छाई और बुराई दोनों होती है। पर हर दिन, हर परिस्थिति में, हमें ये तय करना होता है कि हम क्या देना चाहते हैं

प्रेम या घृणा, हौसला या आलोचना, रोशनी या अंधेरा?

अच्छा इंसान वो नहीं जो सिर्फ अच्छा सोचता है,
बल्कि वो है जो बिना किसी शोर के,
दूसरों की ज़िंदगी में सुकून का संगीत भर देता है।

अच्छे इंसान की संगत जीवन की सबसे बड़ी पूंजी होती है।
और खुद एक अच्छा इंसान बन जानायह जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि।

Comments

Popular posts from this blog

जब हनीमून बन जाए जाल: भारत में वैवाहिक हत्याओं की खतरनाक प्रवृत्ति | समाधान?

   By   VRight Path जो कभी प्रेम, साथ और उत्सव का प्रतीक हुआ करता था — हनीमून — अब भारत में चिंताजनक सुर्खियाँ बन रहा है। एक नई प्रकार की घरेलू अपराध श्रृंखला सामने आ रही है जिसमें पत्नियाँ अपने पतियों की हत्या की योजना बनाती हैं , और वह भी प्रेम यात्रा या छुट्टियों के दौरान। मेघालय में इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी की पत्नी सोनम रघुवंशी द्वारा योजनाबद्ध हत्या इसका ताजा उदाहरण है, जो यह दर्शाता है कि वैवाहिक रिश्तों में भीतर ही भीतर एक खतरनाक हिंसा पनप रही है। चर्चित घटनाएं: राजा रघुवंशी हत्याकांड (मेघालय, जून 2025) इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की उनकी पत्नी सोनम द्वारा मेघालय की यात्रा के दौरान हत्या कर दी गई। यह मामला एक सुनियोजित साजिश थी जिसमें तीन सुपारी किलरों को शामिल किया गया था। सोनम ने खुद गाज़ीपुर में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। मेरठ केस – शव को ड्रम में सील किया गया मेरठ में एक महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने पति की हत्या कर दी और शव को सीमेंट ड्रम में बंद कर दिया। मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश फैलाया। बिहट, बिहार – सोशल मीडिया कनेक्शन ...

गणेश चतुर्थी 2025 : ज्ञान, एकता और आध्यात्मिक परिवर्तन का पर्व

मुंबई , महाराष्ट्र : गणेश चतुर्थी 2025 का पर्व 27 अगस्त को धूमधाम से मनाया जाएगा। यह पर्व भगवान गणेश की पूजा का पर्व है , जो विघ्नहर्ता , बुद्धि के देवता और समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं। इस वर्ष , यह पर्व न केवल सांस्कृतिक उल्लास का प्रतीक है , बल्कि आध्यात्मिक जागरण , विनम्रता और एकता का भी संदेश देता है। (  English  ) Lalbaug Raja 1st Darshan ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व गणेशोत्सव की शुरुआत 1893 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने की थी , ताकि यह पर्व समाज में एकता और राष्ट्रीयता की भावना को प्रोत्साहित कर सके। आज यह पर्व महाराष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। आध्यात्मिक अनुशासन और अनुष्ठान ·        निर्जला व्रत : 26 अगस्त 2025 ·        प्रतिमा स्थापना : 27 अगस्त 2025 ( सुबह ) ·        वर्ज्य क्रियाएँ : हिंसा , मांसाहार , नकारात्मक आचरण , आदि से बचें। · ...

श्रावण मास का अंत नहीं : एक ऋतु, एक साधना — संयम, सेवा और शिव से जुड़ाव का समय

  लेखिका :  आयशा   राणा ,  सह - संस्थापक , VRIGHT PATH ॐ नमः शिवाय भारत में श्रावण मास को भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है। यह केवल व्रत या पूजा-पाठ का समय नहीं, बल्कि एक गहन जीवन-दृष्टि और संवेदनशील पर्यावरणीय चेतना का प्रतीक है। लेकिन एक सामान्य प्रश्न अक्सर उठता है:    (  English    ) भारत में श्रावण अलग-अलग तिथियों पर क्यों पड़ता है? इसका मुख्य कारण है भारत में उपयोग होने वाली दो भिन्न चंद्र मास प्रणालियाँ: 1.        अमांत प्रणाली (मास का अंत अमावस्या से): दक्षिण और पश्चिम भारत में जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र, तेलंगाना, गोवा आदि। 2.        पूर्णिमांत प्रणाली (मास का अंत पूर्णिमा से): उत्तर और मध्य भारत जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड आदि। इससे  15 दिन का अंतर आ जाता है। जैसे 2025 में, उत्तर भारत में श्रावण 10 जुलाई से और दक्षिण भारत में 25  जुलाई से शुरू है। श्रावण मास — केवल वर्जन नहीं, बल्कि प्रकृति के लिए करुणा का पर्व मानसून के इस मौसम में: ·...